नीलकंठ के कयास
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[ नीलकंठ एक मानसिक चरित्र है। वह गंगा किनारे बरियापुर में रहता है। गंगा
वहां मनोरम दृष्य बनाती हैं— यू टर्न इस तरह लेती हैं कि वहां घाट से सूर्योदय
और सूर्...
1 day ago
कहानी अपनी-अपनी.....
मुद्दतें गुज़रीं तेरी याद भी आई न हमें
और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं
ज़रा विसाल के बाद आइना तो देख ऐ दोस्त
तेरे जमाल की दोशीज़गी निखर आई
तुम मुख़ातिब भी हो क़रीब भी हो
तुम को देखें कि तुम से बात करें
4 comments:
अति सुंदर |
दीपावली की हार्दिक बधाईयाँ और शुभकामनाये | आप अपने ब्लाग पर हिन्दी राईटर को भी ज़गह दे आपके पाठकों को आसानी रहेगी |
बहुत गहरी बात!!!! वाह!!
आपको एवं आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.
बहुत सुंदर लिखा है. दीपावली की शुभ कामनाएं.
toooo good ..
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