जरई और रक्षाबंधन
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राखी का बाजार बचा रहा, जरई का संसार चला गया। गरिमा, मेरी बहन, की राखी समय
पर आ गई है—स्पीड पोस्ट से। सालों से पोस्ट ऑफिस के माध्यम से मिलती रही है।
पहले सा...
1 week ago
कहानी अपनी-अपनी.....
मुद्दतें गुज़रीं तेरी याद भी आई न हमें
और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं
ज़रा विसाल के बाद आइना तो देख ऐ दोस्त
तेरे जमाल की दोशीज़गी निखर आई
तुम मुख़ातिब भी हो क़रीब भी हो
तुम को देखें कि तुम से बात करें
2 comments:
बढ़िया खबर है .... मतलब भूल छोक लेनी देनी बराबर हो जायेगा ...
यह एक बहुत ही अच्छा विचार लगता हैं ।
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