Wednesday, June 4, 2008

रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे....!

हालिया दिनों में भोजपूरी गीत और अश्लीलता, एक दूसरे के पर्यायवाची हो गए थे। लेकिन ऐसा नहीं है। दरअसल लोकगीत संस्कृति संक्रमण के दौड़ से गुज़र रही है। एक्सपेरिमेंट्स हो रहे है। अच्छे-बुड़े सभी तरह के गीत सामने आ रहे हैं। धीरे-धीरे च़ीजें सामान्य हो जाएंगी।
फिलहाल विरह की आग में जलती हुई एक स्त्री के इस गीत का आनंद लें..........


काहे के लेले टिकसवा पिया गिरल बिजुरी करेजवा पर फाटल हिया...त बड़ के भिनसहरे उठ के नहा धो के हो, लोड़ी भर के मनौती मांगत रहे। काली माई से का मनौती मांगा तिया? जानत रहे कि उ रेल गाड़ी से जाई वाला बारन....
रेलिया बैरन...पिया को लिए जाए रे...
रेलिया बैरन, पिया को लिए जाए रे.....(3)


पहले मनौती का मंगलस....(First Wish From God)
जौने टिकसवा से, पिया मोरे जैईहें......(3)
बरसे पनिया, टिकस गलि जाए रे.....(2)


सोचलस पानी भईल न भईल....त दोसर मनौती का मंगलस भैया......(Second Wish From God)
जौने शहरवा में पिया मोहे जैईहें.........(3)
लग जाए अगिया, शहर जल जाए रे.....(3)


सोचलस आग लागे न लागे....त तेसर मनौती का मंगलस.....(Third Wish From God)
जौने मलिकवा के पिया मोरे नौकर....(2)
पड़ जाए छापा, पुलिस लै जाए रे.......(3)

रेलिया बैरन, पिया को लिए जाए रे................(3)


और अंतिम में मनौती मंगलस....सोचलस का बात बा भैया, इतना रोकला पर भी न रूके.....(Last Wish From God)
जौने सवतिया के पिया मोरे आशिक....(3)
गिर जाए बिजुरी, सवत मर जाए रे.....(2)

रेलिया बैरन, पिया को लिए जाए रे.....(2)

(Affirmation from the beloved...Have Patience....I am your's forever)
अरे.....धीर धर गोरिया रे, तोरे पिया रहिएं....(3)
विनती करिहें, पिया जी घर आएं रे......(3)

रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे.......

9 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत बढ़िया. ऑडियो भी है क्या? पॉडकास्ट करें तो मजा आये.

Neeraj Rohilla said...

भोजपुरी हमें ज्यादा समझ तो नहीं आती है लेकिन भोजपुरी गीत सुनने में बहुत अच्छे लगते हैं । अभी कुछ दिन पहले एक गीत सुना था "स्कूल के टैम पे" :-)

मनोज तिवारीजी का एक गीत बहुत अरसे से खोज रहे हैं, आपके पास हो तो सुनवायें अथवा ईमेल से भेजने का कष्ट करें ।

"एम. ए. में लेके एडमीशन कम्पटीशन देता, बच्वा हमार कमपटीशन देता"

Anonymous said...

Its really good to know that Bhojpuri ,once rich in language and culture ,has retain its glory.After Sharda sinha there was a vaccum which is now filled by Devi,Manoj tiwari and several others ......
Thanks for ur work which showcased the effort done by those people .
Jai Bihar and Jai Bhojpur

Ashok said...

राजीव जी, लोकगीत का अपना एक अंदाज है। आपने सही लिखा है कि लोकगीत संक्रमण काल से गुजर रहा है। शानदार गीत...दिल खुश हो गया।

मानषी ठाकुर said...

"सवतिया", का पर्याय शायद सौतन है। मैं सही हूं न????

Mrityunjay said...

शहरीकरण और गाँवों से लुप्तप्राय होते रोजगार की कसक भी इस गीत सें स्पष्ट रूप से मिल जाती है। अगर हमारे गाँवों में भी रोजगार के मौके होते तो हज़ारों-लोखों स्त्रियों को विरह में जलने से बचाया जा सकता था। विछोह के इस दर्द को आपने शायद काफी नजदीक से देखा है। देश काल के परिस्थिति का सटीक चित्रण।

Anonymous said...

दिलवाले दुल्हनियां का फोटो क्यो चेप दिए हैं। कोई और नहीं मिला क्या...

sushant jha said...

अद्भुद है।

Arvind k said...

Thanks for posting this song !!Audio Plz !!