Friday, June 27, 2008

ब्लॉग मा बड़ी आग है.....

मीडिया के भविष्य पर विचार करने के बाद एक दिन सिर खुजलाते हुए खयाल आया कि क्यों न ब्लॉग के भविष्य में झांका जाए। माफ कीजिएगा मैं कोई भविस्यद्रष्टा या ज्योतिषी नहीं हूं लेकिन कुछ सपने थे, बल्कि हैं भी शायद जो मौजूदा वक्त से आगे जाकर देखने के लिए मजबूर करते हैं। अपने यहां ब्लॉगिंग अभी बचपने में ही है लेकिन कम समय में जिस तरह से ब्लॉगों की तादाद में इजाफा हुआ है उससे लगने लगा है कि ये जल्द ही जवान हो जाएगा। वो कहते हैं न पूत के पांव पालने में। सच है ब्लॉग की वर्चुअल दुनिया में न किसी नियम कायदे से बंधने का डर है, न किसी मठाधीश का भय। सबसे बड़ी बात तो ये कि यहां न किसी एडिटर का दबाव है और न ही सर्कुलेशन या टीआरपी का झंझट। लेकिन ब्लॉग की टीआरपी लगातार बढ़ रही है। संभावनाओं का विराट संसार खुल गया हैं। साथ ही कई चुनौतियों ने भी दस्तक दे दी है। इनमें सबसे बड़ी चुनौती है ब्लॉगों का कंटेंट और उनका नियंत्रण। हलांकि यह अभिव्यक्ति और संचार का स्वतंत्र और सशक्त माध्यम है और इसे किसी रेग्यूलेशन में जकड़ना उचित नहीं जान पड़ता है। लेकिन कुछ हद तक यह जरूरी भी है।

इंटरनेट की बड़ी पहुंच को देखते हुए ब्लॉगों का कंटेंट रेग्यूलेशन एक मुश्किल काम है। हो सकता है कि आने वाले समय में कोई रेग्यूलेटरी फ्रेमवर्क वजूद में आ जाए। लेकिन वास्तविक नियंत्रण ब्लॉगिंग क्म्यूनिटी को अपने अंदर से ही करना होगा। कुछ उसी तरह से जैसे प्रिंट मीडिया ने अपने लिए किया है। हरेक अख़बार का अपना एक पाठक वर्ग है। समय के साथ गंभीर ब्लॉग्स भी अपना एक पाठक वर्ग बना लेगा। बाकी सरवाईव कर पाएं, यह देखने वाली बात होगी। देश में अभी कुल चार लाख रजिस्टर्ड ब्लॉग्स हैं जिनमें सिर्फ चालीस हज़ार ही सक्रिय हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है कि लगातार कंटेंट जेनरेट करना अपने आप में एक टेढ़ी खीर है। पढ़ने लायक सामग्री जेनरेट करते रहना तो उससे भी बड़ी चुनौती है। पोस्ट में कमी आई नहीं कि आप पाठकों के रडार से आउट हो गए। मुस्तकिल क्वालिटी लिखने वालों में भी कम ही ऐसे खुशनसीब हैं जिन्हें लगातार हिट्स मिलता है। सच यह भी है कि शायद ही कोई ऐसा ब्लॉगर हो जो अपनी खुशी के लिए लिखता हो। मैं ख़ास कर हिंदी ब्लॉगरों की बात कर रहा हूं। सब पाठकों की तलाश में रहते हैं। फिर कमेंट्स\ फीडबैक से अपनी लोकप्रियता का अंदाजा लगाते रहते हैं। ज्यादा कमेंट्स, यानि हिट.....कम तो फुस्स....। इसमें कुछ ग़लत भी नहीं है।
कमेंट्स वो उर्जा है जिसपर सवार होकर ब्लॉगर्स तरह-तरह के कंटेंट जेनरेट कर रहे हैं। मेरा दावा है कि कमेंट्स मिलना बंद हो जाए तो बड़े से बड़े लिक्खाड़ की हिम्मत भी जवाब दे जाएगी। कमिटमेंट, कंटेंट और कमेंट्स के रूप में पाठकों की प्रतिक्रीया - (3 C)- तीन ऐसे फैक्टर हैं जो ब्लॉगिंग को नई उंचाईयां देंगे। रोचक सामग्री वाले कमिटेड ब्लॉगर्स पाठको के बीच धीरे-धीरे जगह बना भी रहे हैं। ब्लॉगर्स वर्चुअल रह कर भी हमारे जीवन में अपनी अपस्थिति दर्ज़ करा रहे हैं। हम-आप में से बहुत कम ही अविनाश, रवीश, अनामदास, रवि रतलामी से मिले हैं। लेकिन नाम लेते ही जेहन में मोहल्ला और नई सड़क आ जाता है।

अगर बात करें मुद्दों की... तो इनमें जाती तजुर्बा, सियासत, समाज, मीडिया, तकनीक, कविता, कहानियां, व्यंग्य, सेक्स ही अभी प्रमुख हैं। आर्थिक मुद्दों पर ब्लॉग कम या ना के बराबर हैं। दरअसल, यह एक आईना है हमारे समाज का....वहाँ हो रहे बदलावों का। पश्चिम में राजनीतिक टीकाकार अपना ब्लॉग चलाते हैं। वहाँ खास विषयों को समर्पित ब्लॉग्स का अपना क्रेज़ है। इंटरनेट पेनेटरेशन भी कंटेंट क्वालिटी को रेग्यूलेट करने में अहम भूमिका निभाता रहा है।

हिंदी ब्लॉग, ग्लोबल ब्लॉगिंग की दृष्टि से अभी भी शुरुआती दौर में हैं। लेकिन देर-सवेर हमारे ब्लॉग्स भी राजनीतिक, सामाजिक कमेंटरी के विश्वसनीय और वैकल्पिक माध्यम बन जाएंगे। सेक्स और सेक्स संबंधी कंटेंट से हमारा लगाव यह भी बतलाता है कि वैश्विक समाज में हम कहाँ हैं। शायद यह पहली बार है जब हमारा समाज न सिर्फ़ इतना खुला है, बल्कि उसके पास इंटरनेट जैसे टूल्स भी है जिससे वह सेक्स जैसे वर्जित मुद्दों पर भी खुल कर बात कर रहा है। इंटरनेट की एनोनिमिटी लोगों को और अधिक एक्सप्रेसिव बना रहा है। वे इश्यूज़ पर जम कर डिबेट कर रहे हैं। सेक्स जैसे टैबू विषयों पर खुले दिमाग से बहस करने में कोई हर्ज़ नहीं है। एक बार समाज अपनी दबी कुंठाओं, भड़ासों को इंटरनेट के माध्यम से उगल ले, फिर उसे क्रिएटिव कामों में लगाया जा सकेगा। हरेक सभ्यता इस फेज़ से गुजरती है। पश्चिम ने यौन क्रांति 60 के दशक में ही देख लिया है। हमारे यहाँ यह आज हो रहा है। कुछ मुल्कों में दस-बीस साल बाद होगा। लेकिन होगा जरूर....।
हिंदी में भी तकनीक, खेल, संगीत, बिज़नेस, हेल्थ, ज्योतिष से जुड़े ब्लाग्स नज़र आने लगे है। अमिताभ बच्चन, जॉन अब्राहम, आमिर खान, लालू यादव जैसी हस्तियों ने ब्लॉग की ताक़त को पहचाना है। बस, कुछ समय की बात है नामी-गिनामी लेखक, पत्रकार, सामाजिक-राजनीतिक टीकाकार , कलाकार और संगीतकार भी ब्लॉगिंग की दुनिया में दिखने लगेंगे। पश्चिम में नौकरी खोजते वक्त सीवी की जगह अब ब्लॉग देखा जाने लगा है बल्कि मेरी जानकारी में सीएनईबी चैनल में काम करने वाली लड़की को सिर्फ इसलिए इंडिया न्यूज में नौकरी की पेशकश की गई थी क्योंकि वह अच्छा ब्लॉग लिखती है। आनेवाले वक्त में यकीन मानिए, ब्लॉग आपके मोबाईल नं. और ई-मेल आईडी की तरह जरुरत बनने जा रहा है..और अगर आप इससे चूके तो आप सोशल रडार से अक्सर बाहर नजर आएंगे।

8 comments:

Shoaib said...

Excellent insight into the Brave new world of blogs.....keep enlighting.

मनीष सिंह said...

शानदार विश्लेषण...और 3C वाला कंसेप्ट भी बढिया है। ज्योतिष और संगीत से जुड़े ब्लाग अब दिखने भी लगे हैं।

प्रभाकर पाण्डेय said...

शानदार और सटीक लेखन। बहुत ही उम्दा विश्लेषण।
साधुवाद।

khabaree said...

सच सटीक लिखा जारी रखिए

अजय रोहिल्ला said...

:-) भविष्य के ब्लॉग में आपने अच्छा झांका है। लेकिन कम्यूनिटि ब्लॉग का ज़िक्र छूट गया....बाकी मस्त है।

अविनाश्‍ा said...

10 Reasons Why a Blog is Better Than a Website

Tay

So many people wonder whether they should start their online hobby or business as a blog or a static website. The two have many differences, but I honestly believe that in most cases a person should start a blog instead of a website. Some still remain unconvinced, especially since blogs are newer on the scene. However, these are the reasons why I think a dynamic blog is better than a static website.

1. Blogs are easier to setup and manage.

A blog can be installed with Wordpress, the best blogging platform and my choice, in five minutes. You don’t have to get up close and personal with coding it, all of the core files are already there for you and all you have to do is upload them and create a database (which takes two seconds). You can find an amazingly beautiful theme or design, upload it in one minute, and if you want you can easily tweak it. You can login to the user-friendly dashboard and write your content, manage your categories and comments, change your options or blogroll, and much more without dealing with anything over the top and complicated. The blog platform does all the work with the technical stuff while you get to enjoy writing for your site and running it however you like.

2. Blogs retain interest.

Because blogs are updated all the time and it’s easy to browse through them and all of their content, that makes them a favorite with online visitors and readers. A visitor is much more likely to return to a blog than a static website. Blogs catch and hold attention and it’s easier for the reader to get lost in one for hours since the content is navigated the way it is. That can happen with a website, but it’s a lot less likely. Blogs are at more of a personal level, and all of the posts are easily accessible and featured for the readers. Instead of a website where visitors have to crawl through page after boring page, consider a blog and keep your readers longer and have them coming back all the time for more.

3. Blogs are more search engine friendly.

Just like they’re reader friendly for being updated all the time and having a huge collection of interlinked content, they’re search engine friendly for those same reasons as well. It’s not always true, but more than likely that a blog will rank better in search engines than your average website. The more a site is updated, the more often a search engine bot will come back and crawl your site so they can quickly index the new things you have to offer. And when a bot is coming to crawl your site, it will have many more options with a blog since all of the content is linked to and featured everywhere. Besides those things, blogs are easy to optimize, especially with all the plugins available (see All In One SEO Pack). And blogs attract links more than static websites as well, which will help you out in the search engines too.

4. Blogs gain an audience more easily.

Just like how I mentioned that blogs retain interest, they also more easily gain an audience. With the abundance of content and such a navigable site, readers will like your blog. A blog will also be found for the first time by visitors because they are usually much more popular than a static website. If you write good content and provide things of interest, you’ll get noticed easily. And once you start building a readerbase, your readers will help promote your blog for you. People will talk about you, link to you, and grow your blog for you. Usually when I first learn about a blog I learn about it through someone else or another a blog I read. People like to stay on top of blogs about topics they’re interested in, and that’s easier to do with a blog. And for an audience, the easier it is the better.

5. Blogs help build author and visitor interaction.

When you have a static website your visitors aren’t going to be known to you like they would with a blog. With a blog, anyone who likes your page or post can comment on it. You’ll start to learn your readers’ names and their own blogs or sites. You’ll have conversations with them and discuss topics through the comments or email. And even if a reader doesn’t comment, you might see them voting for your content a lot via social media, their avatar might be popping up a lot on your MyBlogLog widget, or you might be getting linked to by them and see it via your trackbacks and incoming links. As your blog grows you’ll come to recognize hundreds to even thousands of your readers, with dozens becoming people you know much more closely.

6. Blogs can be made to look however you want.

Like I mentioned earlier, you can achieve any look you want with your blog, WITHOUT having to get up close and personal with the coding. There are so many free themes, plugins, and resources available that are already built and coded for you - all you usually have to do is upload them and click the ‘activate’ button. If you find a theme you like you can upload it, and if necessary, tweak it here and there to make it perfect for your blog. Plugins can manage and run things automatically without you having to lift a finger after you install one. There are plugins that work behind the scenes and block spam, create navigation systems, generate sitemaps, and enforces WWW or non-WWW for your blog. Then there are visual ones, like plugins that encourage visitors to subscribe, create contact forms, rotate advertisement banners, let you create polls for your blog, and thousands more. A blog can look however your heart desires - it can even look like a static website if that’s what you want, while still being managed much more easily.

7. Blogs allow readers to subscribe via RSS.

RSS readers are one of the most valuable things a blog can have. Subscribers are people who love your blog and what you write so much that they want it delivered to their feed aggregator or their email inbox each day. They are people who are targeted to your content and are probably your blog’s biggest fans. By allowing people to subscribe, developing regular readers is even easier than it was before. The amount of RSS subscribers a blog has is one of the ways to determine how popular and valuable it is. Besides providing value to you, it provides obvious value to your readers as well and makes things much easier for them to read everything you write.

8. Blogs are popular with social media sites.

Since blogs have a bigger sense of community and the blog owner and readers interact, (as well as bloggers interacting with other bloggers), you’d know blogs are popular with social media sites, like Super Blogging’s readers’ favorite StumbleUpon. Since you’re already building relationships with the readers who come to your blog, it’s easy to encourage social media votes and promote your blog this way. Loyal visitors and blogging friends will often vote for your best content, and using a blog over a website content is easier to promote.

9. Blogs build links much more easily.

And again, since blogs have such a huge community and personal aspect to them, they gather much more links. Bloggers try to link to other blogs as much as possible, not only because this helps build exposure and traffic (since a blogger is alerted whenever they receive a link), but also because blogs are huge sources of easily browsed information to direct their readers to. At Super Blogging you might notice I do weekly roundups called “The Best of the Blogosphere”. I do this to point my readers to fantastic content from other bloggers, and also to get those other bloggers’ attention. And since blogs collect many links each day or week, they often develop better rankings in search engines as well.

10. Blogs are better for a million more reasons.

What other reasons do you need? They’re easier to setup, easier to manage, have thousands of free themes and plugins to install, build a loyal readerbase quicker, are promoted by others, retain interest, are more popular with search engines AND social media, are easily customized, promote interaction, offer RSS subscriptions, and much more. Websites used to be the only choice, but blogs are quickly gaining popularity to overrank them. It always depends on the goal you want to achieve, but 95% of the time I’d tell you to start a blog.

डा० अमर कुमार said...

ब्लागिंग पर यह मीमांसा सार्थक लगी ।

sushant jha said...

राजीव..आपने गहरा विश्लेषण किया है...आप बधाई के पात्र हैं...