Monday, August 3, 2009

थैंक यू राखी

प्रिय राखी,
सच मानो तो मुझे इस बात का जरा भी यकीन नहीं था कि तुम किसी के गले में वरमाला डालोगी। लेकिन तुमने मेरे संदेह को गलत साबित कर दिया। तुमने राखी के त्यौहार आने से पहले ही अपना स्वयंवर रचा लिया है। दिल को थोड़ा सूकून मिला। मुझ से ज्यादा खुशी एनडीटीवी वालों को हुई होगी। चैनल के सीईओ, समीर नायर किस व्याकुलता से तुम्हारी स्वयंवर को देख रहे थे, इसका अंदाज़ा तुम्हें नीचे लगी तश्वीर से हो जाएगी। तुमने नखड़े तो जरूर किए होंगे, लेकिन अख़िर में तुम मान गई होगी। ये पैसा जो न कराए। मुझे उम्मीद है कि तुम सरल स्वभाव वाले इलेश से जल्द ही शादी भी कर लोगी। तुम्हारे मायके (इमेजिन) वालों ने कितनी तैयारी की थी। लग रहा था मानो इंद्र के दरबार में किसी अप्सरा का स्वयंवर चल रहा हो। हिंदी पट्टी की जनता सांस थामे उस यादगार पल को अपनी आंखों में कैद कर रही थी। लगा सब कुछ उन चंद घंटों के लिए ठहर सा गया है।

मैं तुम्हें बिल्कुल ही पसंद नहीं करता था, लेकिन सच पूछो तो अब तुम अच्छी लगने लगी हो। अब इसमें मेरी भी कोई ग़लती नहीं है। निम्न मध्यमवर्गीय परिवार से आता हूं, रिश्ते मेरे लिए अनमोल हैं। संबंधो के ताने-बाने भले ही जटिल हो, लेकिन मैं उनसे बेतरह प्यार करता हूं। ये सिर्फ़ मेरी ही कहानी नहीं है। आर्थिक उदारीकरण के बाद एक बहुत बड़ा मध्यम वर्ग पैदा हुआ है, जिसके पैर तो संस्कारों में धंसे हुए हैं, लेकिन ख़्वाब आसमान छूने की है। तुम उसी मिडिल क्लास के सपनों की ताबीर हो। तुम्हारे चुनाव से मैं इत्तेफ़ाक रखता हूं। लेकिन मेरे नौकर को मनमोहन तिवारी पसंद था। तुमने एक पारसी को जीवन साथी चुनकर संप्रदायिक शक्तियों के मुंह पर तमाचा भी मारा है। तुम सचमुच सेक्युलर हो। कांग्रेसी नेताओं की नज़र भी तुम पर है। एनडीटीवी तो तुम्हारे इस कृत्य से निहाल ही हो गया होगा। कोई कह रहा था कि एनडीटीवी वालों को तुम्हारा पैर धो कर पीना चाहिए। तुमने एक डूबते चैनल को तिनके का ही सही, सहारा तो दिया। न्यूज़ चैनल वाले भी तुम्हारे मुरीद हो गए। ख़बरों की इस मंदी में तुम्हारे स्वयंवर के कटपीस विजुअल्स से न जाने कितने घंटों तक इन्होंने ब्रेकिंग न्यूज़ ताने रखा।
पता नहीं तुम्हें इस बात का अंदाज़ा है भी या नहीं कि जाने अनजाने तुमने एक सामाजिक क्रांति कर दिया है। तुम्हारे स्वयंवर नें एक अदृश्य लेकिन मुक्कमल रेखा खींच दी है। हर लड़की अपनी शादी में तुम्हारे स्वयंवर की तरह ही तामझाम का उम्मीद पाल बैठेगी। अब हर कोई तो फराह खान का डिजाइन किया हुआ 30 लाख का नैकलेस और नीता लुल्ला का डिजाइन किए लहंगा चुन्नी अफार्ड नहीं कर सकती न। अब देखो न तुम्हारे देखा-देखी अमृता राव भी स्वयंवर करने की इच्छा रखने लगी हैं। तुम्हारा स्वयंवर उस व्यवस्था के ख़िलाफ़ भी आगाज़ है जिसमें लड़की पक्ष को हेय दृष्टि से देखा जाता है। तुम्हारा ये स्वयंवर भारतवर्ष के उस प्राचीन गौरव को लौटाने की ओर भी एक सार्थक कदम है, जिसमें लिंग आधारित विभेद के लिए कोई जगह नहीं था। सीता, द्रोपदी और अहिल्या के साथ अब तुम्हारा नाम भी इतिहास में दर्ज़ हो जाएगा। बल्कि मेरा तो यहां तक मानना है कि तुम्हारा स्वयंवर सीता और द्रोपदी के मुकाबले ज्यादा रैशनल था। तुमने अपने जीवन साथी को कई पैरामीटर्स पर टेस्ट किया। अब अगर राम जी की जगह कोई राक्षस शिव के धनुष की प्रत्यंचा चढ़ा लेता तो क्या होता? अर्जुन की जगह कोई और राजकुमार मछली की आंख में निशाना साध लेता तो फिर द्रोपदी क्या करती??? सबसे ताक़तवर या फिर अचुक निशाना लगाने वाला एक अच्छा पति भी साबित हो यह कहां लिखा है??? है न....तो तुम उस हिसाब से भी उन पर बीस हो। हलांकि मुझे लगता है तुम्हें जीके, जीएस के साथ-साथ लड़कों से समसामायिक विषयों पर ऐसे (लेख) भी लिखवाना चाहिए था। जिससे कि मेरे जैसे लड़के भी स्वयंवर भी जाने की हिम्मत दिखला पाते। एक बात और जो मुझे बुरा लगा वो ये कि जब तुमने पहले से फ़ैसला कर लिया था कि तुम इलेश के गले में ही वरमाला डालोगी तो तुम्हें मानस और क्षितिज के परिवार वालों को नहीं बुलाना चाहिए था। बल्कि किसी भी प्रतिभागी के घरवालों को नहीं बुलाना चाहिए था। कितनी ख़ुशी से दोनों के मां-बाप बारात में नाच रहे थे। बाद में उनका उतरा हुआ चेहरा मन को थोड़ा गीला कर गया। तुम्हारे घर वालों की कमी भी अखड़ रही थी। वो क्यूं नहीं आए, ये तो मैं नहीं जानता। लेकिन, इतना पता है कि कन्यादान से बड़ा दान कोई भी नहीं होता। ख़ैर, मैंने तुम्हारे स्वयंवर के पक्ष में कई सही-ग़लत तर्क गढ़ दिए हैं। अब अगर तुम इलेश से शादी नहीं करोगी तो लोग मेरा मज़ाक उड़ाएंगे। इसलिए प्लीज़ राखी, 6 महीने बाद ही सही, बिना मेकअप के ही सही.....इलेश से शादी कर लेना।

‘राजीव’

5 comments:

Winamp Skin said...

hello!
if you got time, please check our website.

thanks.

sushant jha said...

साधु-साधु...राजीव, आपकी सोच पवित्र है।

anupam mishra said...

ये एक छद्म है...

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

6 महीने क्या 6 साल में भी कुछ नहीं होने वाला!
अभी तो इस स्वयंवर कथा के कईं अध्याय लिखे जाना बाकी है:)

अजय कुमार झा said...

rakhi ko gajbe dhanyavaad diye hain aap ..bechaaree sharm se laja jaayegee.