Thursday, October 1, 2009

60 का हुआ ड्रैगन...

आज दुनिया की नज़र बीजिंग पर टिकी होगी। ड्रैगन अपनी शक्ति का सार्वजनिक प्रदर्शन करेगा। इस वक्त का इंतज़ार चीन वर्षों से कर रहा था। नई दिल्ली से वॉशिंगटन तक सरकारें सांस थामकर चीन के ताक़त का दीदार करेंगी। ऐसा भव्य समारोह दुनिया पहली बार देखेगी। और इसे सफ़ल बनाने के लिए चीनी सरकार ने कोई भी कसर बाकी नहीं छोड़ी है। चीनी सेना की 66 मिनट की ये परेड भले ही प्रतीतात्मक हो लेकिन दुनिया के लिए संदेश स्पष्ट है। चीन मंच पर आ चुका है...। दुनिया मुगालते में न रहे....ड्रैगन यही संदेश दे रहा है। अब से कुछ ही देर में, चीन एक भव्य समारोह के साथ विश्व मंच पर अपने आगमन की घोषणा करेगा।

बीज़िंग की सड़को पर सन्नाटा पसरा है। कुछ सुनाई दे रहा है तो वो चीनी सेना के जूतों की टाप, सेना की टैंकों की घड़घड़ाहट...बीज़िंग के आसमान का सीना चीरती जंगी जहाजों का शोर...। पूरे चीन में मोबाईल फ़ोन के रिंगटोन और कॉलर ट्यून को बदल दिया गया है। राष्ट्र गान के अलावा कुछ भी सुनना अपराध की श्रेणी में डाल दिया गया है। कल वहां आप तालाक भी नहीं ले सकते...। पतंग, कबूतर का दीदार महीनों से बीज़िंग की आसमान में नहीं हुआ है। यहां तक की मच्छर, चूहे भी अपनी बिल से बाहर नहीं निकल सकते.... मेहमान रात में किसी के घर पर नहीं ठहर सकते। होटल और गेस्ट हाऊस की गेट पर ताला जड़ दिया गया है। इंटरनेट और नेटवर्किंग साईट्स ब्लॉक है....। दमन, सेंसरशिप, मानवाधिकार हनन, सब का सहारा लिया जा रहा है। कम्युनिस्ट चीन ने बीज़िग से भिखारियों और बेघर लोगों को तड़ीपार कर दिया है। परेड में हिस्सा ले रहे सैनिकों की तैयारी का अंदाजा इसी बात से लगया जा सकता है कि वे 40 सकेंड में सिर्फ़ एक बार पलक झपका सकते हैं। मीडिया सेंसरशिप का आलम तो यह है कि वे सिर्फ़ 20 प्रतिशत नकारात्मक ख़बर दिखा सकते हैं। 52 नए हथियार पहली बार दुनिया देख सकेगी....। आख़िर चीन ये सब क्यों कर रहा है??? कहीं इसमें असुरक्षा की भावना तो नहीं......संभव है, जहां एक तरफ पूरी दुनिया धीरे-धीरे पुंजीवादी व्यवस्था की ओर बढ़ रही है शायद चीन ऐसे में अपनी कम्युनिस्ट व्यवस्था की प्रासंगिकता दिखलाना चाह रहा हो....।।।