रविवार की सुबह
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गांवदेहात डायरी सवेरे साइकिल चला कर लौटा तो रामसेवक आ चुके थे। वे हमारे
माली हैं और रविवार को आधा दिन हमारे बगीचे को देते हैं। मैं गेट खोलकर अंदर
घुसा त...
5 hours ago
कहानी अपनी-अपनी.....
मुद्दतें गुज़रीं तेरी याद भी आई न हमें
और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं
ज़रा विसाल के बाद आइना तो देख ऐ दोस्त
तेरे जमाल की दोशीज़गी निखर आई
तुम मुख़ातिब भी हो क़रीब भी हो
तुम को देखें कि तुम से बात करें
1 comment:
Guru kamal ka liya....
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