Sunday, November 8, 2009

गीयर वाला रिक्शा

मैट्रीक पास करने पर पिताजी ने गीयर वाली साईकल नहीं दिलाई थी। दो दिनों तक रूठा रहा। फिर समय के साथ स्मृतियां धूमिल होती चली गईं। कार ख़रीदने का प्लान कर रहा हूं। गीयर वाली कार...। दोस्तों नें बताया कि गीयर वाली साईकिल से हवाई जहाज को भी पछाड़ सकता हूं। शर्त यह की मेरे अंदर उतनी एनर्ज़ी होनी चाहिए। पटना में साईकिल चलाते वक्त बगल से गीयर वाली साईकल आगे निकल जाती तो मन में एक कुंठा घर जाती...काश! पिताजी ने यह साईकिल दिला दी होती, कम से कम बीच सड़क पर बेटे की नाक तो नहीं कटती। हां, बाकी कार, स्कूटर, बाईक को अपने साईकिल से आगे होता देख रेस लगा लेता, और पटना की तंग सड़कों ने हमेशा आगे रहने में मदद की। प्लान तो टूर द फ्रांस में हिस्सा लेने का भी था। लेकिन हालात और रोजी रोटी नें विचारों का दम कई साल पहले ही घोंट दिया। चलिए कोई ग़म नहीं...। आज अचानक रायपुर में चलने वाली इस रिक्शे पर नज़र चली गई। क्युट कंपनी का आण्डाकार गीयर...। अब रिक्शा भी तेज़ चलेगी। दो बीघा ज़मीन के शंभू महतो का दम भी नहीं निकलेगा।

4 comments:

काजल कुमार Kajal Kumar said...

ख़बर अच्छी है पर उम्मीद है कि यह सस्ता व टिकाउ विकल्प होगा

M VERMA said...

प्लान तो टूर द फ्रांस में हिस्सा लेने का भी था। लेकिन हालात और रोजी रोटी नें विचारों का दम कई साल पहले ही घोंट दिया।'
रोजी रोटी ने तो बहुतो के विचारो को बदल दिया है. अच्छा लगा गीयर वाला रिक्शा देखकर

शरद कोकास said...

फिर भी रिक्शेवाला तो वही रहेगा,,शोषित , उपेक्षित . जिसे हम जैसे लोग शक की निगाह से देखेंगे और असली लुटेरो को न पहचान कर इस गरीब से कहेंगे " क्यो बे लूटता है क्या ? "

Gyansagar Pratap Soni said...

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