एक तुच्छ सी किरिच का क्या भाग्य लिखा था!
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अरविंदो आश्रम, पॉण्डिचेरी या रतलाम की स्मृतियों में कई बार ऐसी कथाएँ निकल
आती हैं जो मन में यूं घुमड़ती हैं कि छोड़ती ही नहीं। डॉ. हीरालाल माहेश्वरी
ऐसे ही ...
3 hours ago


2 comments:
बढ़िया खबर है .... मतलब भूल छोक लेनी देनी बराबर हो जायेगा ...
यह एक बहुत ही अच्छा विचार लगता हैं ।
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